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क्रेडिट लेजर के माध्यम से 10% जीएसटी अपील फीस जमा

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  सुप्रीम कोर्ट ने व्यवसायों को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते हुए यह अनुमति दी है कि जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) अपील के लिए अनिवार्य 10% प्री-डिपॉजिट को इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर (Electronic Credit Ledger) के माध्यम से भुगतान किया जा सकता है। इसका मतलब है कि व्यवसायों को अब इस प्री-डिपॉजिट के लिए नकद (कैश) भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि वे अपने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का उपयोग कर सकते हैं। मुख्य बिंदु: क्या है प्री-डिपॉजिट? जीएसटी कानून के तहत, यदि कोई व्यवसायी जीएसटी अधिकारी के किसी आदेश या निर्णय के खिलाफ अपील दायर करना चाहता है, तो उसे विवादित कर राशि का 10% हिस्सा प्री-डिपॉजिट के रूप में जमा करना होता है। यह राशि अपील की सुनवाई के लिए अनिवार्य होती है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई, 2025 को यशो इंडस्ट्रीज बनाम भारत सरकार मामले में फैसला सुनाया कि यह 10% प्री-डिपॉजिट इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में उपलब्ध ITC के जरिए जमा किया जा सकता है। यह व्यवसायों, खासकर छोटे और मध्यम उद्यम...

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ITR दाखिल करने में देरी क्यों हो रही है: 7 प्रमुख कारण:-

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  वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ITR दाखिल करने में देरी क्यों हो रही है: 7 प्रमुख कारण:- असेसमेंट ईयर (AY) 2025-26 (वित्तीय वर्ष 2024-25) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग की प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिसके कारण टैक्सपेयर्स में असमंजस और चिंता है। सामान्य रूप से अप्रैल के पहले सप्ताह में ITR फॉर्म्स नोटिफाई हो जाते हैं और जल्द ही उनकी यूटिलिटीज उपलब्ध हो जाती हैं, लेकिन इस साल यह प्रक्रिया जून 2025 तक शुरू होने की उम्मीद है। नीचे 7 प्रमुख कारण बताए गए हैं कि ITR फाइलिंग में देरी क्यों हो रही है: बैकएंड टेक्नोलॉजी अपग्रेड : इनकम टैक्स डिपार्टमेंट डिजिटाइजेशन और ऑटोमेशन पर जोर दे रहा है। एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी (TIS) जैसे सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन को बेहतर करने के लिए तकनीकी अपग्रेड किए जा रहे हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्री-फिल्ड डेटा सटीक हो, डिपार्टमेंट सिस्टम की टेस्टिंग में समय ले रहा है। कैपिटल गेन्स टैक्स नियमों में बदलाव : 23 जुलाई 2024 से कैपिटल गेन्स टैक्स के लिए दोहरे टैक्स स्लैब लागू किए गए हैं। इससे ITR फॉर्म्स में ब...

2025 में ITR फाइलिंग में होने वाली आम गलतियाँ

2025 में ITR फाइलिंग में होने वाली आम गलतियाँ  2025 में आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय कुछ सामान्य गलतियों से बचना जरूरी है ताकि आप जुर्माने, नोटिस या रिफंड में देरी से बच सकें। नीचे 10 सामान्य गलतियां और उनसे बचने के उपाय हिंदी में दिए गए हैं: 1-गलत ITR फॉर्म चुनना अलग-अलग आय स्रोतों और करदाताओं के लिए अलग-अलग ITR फॉर्म होते हैं। उदाहरण के लिए, वेतनभोगी व्यक्ति जिनकी आय 50 लाख रुपये से कम है, उन्हें ITR-1 चुनना चाहिए, जबकि पूंजीगत लाभ या एक से अधिक संपत्ति वाले लोग ITR-2 चुनें। गलत फॉर्म चुनने से रिटर्न रिजेक्ट हो सकता है या प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है। उपाय: अपनी आय के स्रोत और श्रेणी के आधार पर सही फॉर्म चुनें। जरूरत हो तो टैक्स प्रोफेशनल से सलाह लें। 2-ITR दाखिल करने की समय सीमा चूक जाना अधिकांश व्यक्तिगत करदाताओं के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2025 है। देर से फाइल करने पर 1,000 से 10,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है, और आप कुछ टैक्स छूट या नुकसान को आगे ले जाने का लाभ खो सकते हैं। उपाय: समय से पहले तैयारी शुरू करें और अंतिम तारीख से पहले रिटर्न दाखिल करे...