वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ITR दाखिल करने में देरी क्यों हो रही है: 7 प्रमुख कारण:-

 


वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ITR दाखिल करने में देरी क्यों हो रही है: 7 प्रमुख कारण:-

असेसमेंट ईयर (AY) 2025-26 (वित्तीय वर्ष 2024-25) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग की प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिसके कारण टैक्सपेयर्स में असमंजस और चिंता है। सामान्य रूप से अप्रैल के पहले सप्ताह में ITR फॉर्म्स नोटिफाई हो जाते हैं और जल्द ही उनकी यूटिलिटीज उपलब्ध हो जाती हैं, लेकिन इस साल यह प्रक्रिया जून 2025 तक शुरू होने की उम्मीद है। नीचे 7 प्रमुख कारण बताए गए हैं कि ITR फाइलिंग में देरी क्यों हो रही है:

  1. बैकएंड टेक्नोलॉजी अपग्रेड: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट डिजिटाइजेशन और ऑटोमेशन पर जोर दे रहा है। एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी (TIS) जैसे सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन को बेहतर करने के लिए तकनीकी अपग्रेड किए जा रहे हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्री-फिल्ड डेटा सटीक हो, डिपार्टमेंट सिस्टम की टेस्टिंग में समय ले रहा है।
  2. कैपिटल गेन्स टैक्स नियमों में बदलाव: 23 जुलाई 2024 से कैपिटल गेन्स टैक्स के लिए दोहरे टैक्स स्लैब लागू किए गए हैं। इससे ITR फॉर्म्स में बदलाव की जरूरत पड़ी, जिसके लिए अतिरिक्त समय चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए कि यूटिलिटीज इन नए नियमों के अनुरूप हों, डिपार्टमेंट सावधानी बरत रहा है।AIS और फॉर्म 26AS की अपडेट में देरी: AIS और फॉर्म 26AS में डेटा तब अपडेट होता है, जब फॉर्म 16, 16A और TDS/TCS रिटर्न फाइल हो जाते हैं (जिनकी डेडलाइन 31 मई है)। पिछले साल, जल्दी फाइल करने वालों को AIS/26AS में डेटा मिसमैच के कारण डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस मिले थे। इस बार डिपार्टमेंट डेटा को पूरी तरह अपडेट होने तक यूटिलिटीज जारी करने में सावधानी बरत रहा है।
  3. नए टैक्स बिल की तैयारी: 2025 में नया इनकम टैक्स बिल संसद में पेश किया गया, जिसके कारण डिपार्टमेंट का ध्यान फॉर्म्स की नोटिफिकेशन और यूटिलिटीज की रिलीज से हट गया। इस बिल में टर्मिनोलॉजी जैसे "असेसमेंट ईयर" को "टैक्स ईयर" से बदलने जैसे अपडेट शामिल हैं, जिन्हें फॉर्म्स में लागू करने में समय लग रहा है।
  4. यूटिलिटीज की स्थिरता सुनिश्चित करना: पिछले साल 5 जुलाई 2024 को यूटिलिटी में बदलाव के कारण सेक्शन 87A रिबेट से जुड़े नियम बदले गए, जिसके चलते कई टैक्सपेयर्स को डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस मिले। इस साल डिपार्टमेंट स्थिर और त्रुटि-मुक्त यूटिलिटीज रिलीज करने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है।
  5. फॉर्म्स में नए बदलावों का समावेश: ITR-1 और ITR-4 में लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) को 1.25 लाख रुपये तक की सीमा के तहत रिपोर्ट करने की सुविधा जोड़ी गई है। इसके अलावा, ITR-2 में शेयर बायबैक और TDS सेक्शन कोड की अलग-अलग रिपोर्टिंग जैसे बदलाव शामिल हैं। इन अपडेट्स को यूटिलिटीज में लागू करने में समय लग रहा है।
  6. प्रशासनिक और ऑपरेशनल कारण: फाइनेंस एक्ट 2024 में कोई बड़े बदलाव नहीं होने के बावजूद, डिपार्टमेंट की आंतरिक प्रक्रियाएं और तकनीकी अपडेट्स में समय लग रहा है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी फॉर्म्स और यूटिलिटीज सही ढंग से काम करें, डिपार्टमेंट टेस्टिंग और वैलिडेशन में देरी कर रहा है।

टैक्सपेयर्स के लिए सलाह:

  • तैयारी शुरू करें: फॉर्म 16, ब्याज सर्टिफिकेट, कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट, और टैक्स-सेविंग निवेश के प्रमाण जैसे दस्तावेज इकट्ठा करें।
  • AIS और फॉर्म 26AS चेक करें: डेटा में किसी भी त्रुटि को ठीक करने के लिए समय से जांच करें।
  • पोर्टल पर अपडेट्स देखें: इनकम टैक्स पोर्टल (www.incometax.gov.in) पर यूटिलिटीज रिलीज की जानकारी के लिए नजर रखें।
  • जल्दी फाइल करें: यूटिलिटीज उपलब्ध होने पर जल्दी फाइलिंग करें ताकि रिफंड में देरी न हो।

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